सूख गया चौथा सबसे बड़ा सागर, 68,000 km के इलाके में था फैला

इंटरनेशनल डेस्क. कनाडा के सबसे बड़े ग्लेशियर से निकलने वाली स्लिम्स नदी इन दिनों चर्चा में है। पिछले साल सिर्फ चार दिनों में सूख गई इस नदी को लेकर साइंटिस्ट्स ने अब रिपोर्ट पेश की है। इसमें बताया गया है कि कैसे ये नदी ग्लोबल वॉर्मिंग का शिकार हुई। ऐसी ही त्रासदी का शिकार अरल सागर भी हुआ है। कजाखस्तान और उत्तरी उज्बेकिस्तान के बीच मौजूद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अरल सागर तकरीबन 90 फीसदी तक सूख चुका है। ये सागर 68,000 किमी के इलाके में फैलाथा।दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण त्रासदी में से एक…
– एक वो भी दौर था जब 1,534 आइलैंड वाले अरल सागर को आइलैंड्स का सागर कहा जाता था, लेकिन बीते 50 साल में इसका 90 फीसदी हिस्सा सूख चुका है।
– अरल सागर के सूखने की घटना को दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण त्रासदी में से एक माना जा रहा है।
– 1960 से सागर से सूखने का सिलसिला शुरू हुआ और 1997 तक अरल सागर चार लेक में बंट गया था।
– इसे उत्तरी अरल सागर, पूर्व बेसिन, पश्चिम बेसिन और सबसे बड़े हिस्से दक्षिणी अरल सागर के नाम दिया गया।
– 2009 तक सागर का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा पूरी तरह से सूख गया और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा पतली पट्टी में तब्दील हो गया।

सागर के सूखने का असर
सागर के सूखने से सबसे ज्यादा नुकसान यहां की फिशिंग इंडस्ट्री को हुआ। फिशिंग इंडस्ट्री पूरी तरह से खत्म हो गई, जिसके चलते बेरोजगारी और इकोनॉमिक क्राइसिस का दौर शुरू हो गया। पानी सूखने के चलते पॉल्यूशन बढ़ा है और अरल सागर के इलाके में रह रहे लोगों को सेहत से जुड़ी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। मौसम पर भी इसका जबरदस्त असर पड़ा है। गर्मी हो या सर्दी, दोनों ही कहर बरपा रही है।

क्यों आई सूखने की नौबत ?
इस सागर के सूखने की शुरुआत सोवियत संघ के एक प्रोजेक्ट के चलते हुई। 1960 में सोवियत संघ के सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए नदियों का बहाव मोड़ा गया था, जिसके बाद से ही इस सागर के सूखने का सिलसिला जारी है। सागर को सूखने से बचाने और उसके हिस्से उत्तरी अरल सागर को भरने के लिए कजाखस्तान का डैम प्रोजेक्ट 2005 में पूरा हो गया था, जिसके बाद 2008 में सागर में पानी का स्तर 2003 की तुलना में 12 मीटर तक बढ़ा था। पर इस प्रोजेक्ट के चलते ग्लोबल वॉर्मिंग का असर और खतरनाक हो गया और सागर के सूखने का सिलसिला बरकार रहा। तमाम कोशिशों के बावजूद सागर की स्थिति को सुधारा नहीं जा सका।

Source: http://m.bhaskar.com

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