जानें बीएस-4 और बीएस- 6 इंजन में अंतर और खासियतें

एक अप्रैल 2017 से बीएस 3 वाहनों की बिक्री पर रोक लग गई है। नए एमिशन नॉर्म्‍स के चलते सभी कंपनियां सिर्फ बीएस 4 वाले दोपहिया या चारपहिया वाहन बेच सकेंगी। इसके साथ ही 2020 तक देश में सीधे बीएस-6 लागू करने की तैयारी है। बीएस के तहत गाड़ियों में ईंधन से होने वाला प्रदूषण नियंत्रित किया जाता है। इसे बदलने के लिए रिफाइनरियों को काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा। 1 अप्रैल 2017 से बीएस-4 मानक से कम कोई भी वाहन पंजीकृत नहीं होगा।
क्या है बीएस अपग्रेड?।
बीएस को अपग्रेड करने के बाद गाड़ियों में ईंधन से होने वाला प्रदूषण नियंत्रित किया जाता है। जानकारी के अनुसार विकसित देशों की तुलना में भारत में प्रदुषण की मात्र ज्यादा है। अगर इस समय भारत की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां की हवा सबसे ज्यादा जहरीली है। यहां सांस लेना यानी तमाम बीमारियों को न्यौता देना है।
बीएस-4 के फायदे
जहां बीएस-3 वाहनों से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए घातक है, तो वही 1 अप्रैल से चलने वाले बीएस-4 वाहनों से काफी फायदा भी होगा। इससे वॉमिटिंग, सिरदर्द, आंखों व नाक में जलन और फेंफड़ो को होने वाले नुकसान से काफी राहत मिलेगी, इसलिए बीएस-3 वाहनों की जगह बीएस-4 वाहनों को ही खरीदें।
बीएस- 6 के फायदे।
बीएस-6 लागू होने के बाद प्रदूषण को लेकर पेट्रोल और डीजल कारों के बीच ज्‍यादा अंतर नहीं रह जाएगा। डीजल कारों से 68 फीसदी और पेट्रोल कारों से 25 फीसदी तक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो जाएगा। यही नहीं डीजल कारों से (पीएम) का उत्सर्जन 80 फीसदी तक कम हो सकता है।
अब दिन में भी बंद नहीं होगी हेडलाइट ।
देश में लागू हुए बीएस-4 मानकों के तहत अब दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों ने अपने सभी मॉडल से हेड लाइट ऑन-ऑफ करने का सिस्टम ही खत्म कर दिया है। हेड लाइट ऑन ऑफ स्विच की जगह अब सभी दोपहिया वाहनों में आटोमैटिक हेड लाइट सिस्टम (ओएचओ) होगा।
इसमें इंजन स्टार्ट होते ही मोटरसाइकिल की हेडलाइट अपने आप ऑन हो जाएगी। जब तक दोपहिया वाहन का इंजन स्टार्ट रहेगा तब तक हेडलाइट ऑन रहेगी। वाहन चालक इसे चाहकर भी बंद नहीं कर पाएंगे। अब सभी वाहन चालक दिन में भी हैडलाइट जलाकर चलें तो आश्चर्य न करें।
BS-6 की तैयारी में जुटीं कंपनियां।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार एक अप्रैल, 2020 से बीएस-5 से सीधे बीएस-6 की ओर रुख करने का फैसला किया है। भारत में BS-V को स्विच कर के 2020 में सीधा BS-VI स्‍टैंडर्ड तय किए जाएंगे। ऑटो और तेल कंपनियों को इस बारे में अभी से तैयारी करने के लिए कह दिया गया है। इसके के लिए शोध भी शुरू हो चुके हैं। वाहन बनाने वाली कंपनियों को भी इसके अनुरूप इंजन बनाने के लिए कह दिया गया है और इस पर काम शुरू हो गया है। इसके लिए उनके पास भी 2020 तक का समय है। बीएस-6 लागू होने के बाद प्रदूषण को लेकर पेट्रोल और डीजल कारों के बीच ज्‍यादा अंतर नहीं रह जाएगा।
इंजन बनाने की लागत बढ़ेगी।
होंडा कार्स, हुंडई मोटर्स, मर्सिडीज बेंज के सूत्रों का भी कहना है कि वे नए मानकों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसमें कोई कोताही नहीं होगी। इन सभी कंपनियों के लिए भारत दुनिया के सबसे अहम कार बाजार में से एक है। नए निवेश की वजह से क्या आने वाले दिनों में कारों की कीमतें भी बढ़ेंगी। इस बारे में पूछने पर इन कंपनियों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह तय है कि बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 मानक के मुताबिक इंजन बनाने के लिए काफी लागत बढ़ जाएगी।

Sources: www.india.com

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